Nazm -D'dum Dugdugi _Poet_Zulqernain Hasni
Nazm _D'dum Dugdugi Poet_Zulqernain Hasni नसीबन का कुत्ता सुरीला नहीं पर गज़ब भोक्ता है उसे जब भी मौका मिले काटता है मदारी का बंदर बिला नोश है उसे रोज व शब के तमाशे में दुनिया का कब होश है नसीबन का कुत्ता मदारी के बंदर से डरता नहीं है मगर वह किसी और का दम अकेले में भरता नहीं है डडम डुगडुगी है डडम डुगडुगी यह तूने मेरे साथ अपने चहिते की क्यों बात की नोकीले हुए बेल ने खेत कैसे उजाड़ा शब व रोज़ एक बे सरोपा मोहब्बत ने कितना बिगाड़ा फ़साहत बलाग़त कहां तेल लेने गई है समाजी रवय्यै पर इतनी नहूसत सी क्यों छा गई है तुम ही चाहिए हो अभी चाहिए हो डडम डुगडुगी है डडम डुगडुगी यह तूने मेरे साथ है अपनी चहेती की क्यों बात की सलीके़ तरीके पे तुफ़ है नहीं तो नफा़सत पे उससे भी ज़्यादा अभी तुम ... बताओ ना अपना इरादा. टपकती हुई राल ने क्या दिखाया... ना गलती हुई दाल से बारहा बस ख़्याली पुलाव पकाया तुम्हें क्यों बताऊं मेरे मुंह में खाते हुए बाल आया यह सर्कस है लेकिन तबेले में बांधी हुई शेरनी.... कोई जा़यक़ा अब रसीला नहीं है नसीबन का कुत्ता सुरीला नहीं है...