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Showing posts with the label shairy blog 2021

Ghazal_Poet_Abdur Rehman Wasif

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غزل آپ کے درد گزیدوں کی زباں کھولتے ہیں لفظ قرطاس پہ جب دل کا دُھواں کھولتے ہیں  بڑھتی جاتی ہے تعفّن کی ہلاکت خیزی  زخم اپنے جو کبھی تشنہ لباں کھولتے ہیں منتظر شخص یہ بہتر ہے مزید آس نہ رکھ  دل کا دروازہ وہ ہر اک پہ کہاں کھولتے ہیں  آپ ترکش میں رَکھے تِیر برابر کر لیں ہم عزا خانہِ وَحشت زَدَگاں کھولتے ہیں  لب پہ لاتے ہیں وہ بس ایک تبسم کی رمق اور ہمکتے ہوئے دل رختِ گماں کھولتے ہیں آئیے ! آپ کو ملواتے ہیں بیداری سے  آئیے ! آپ پہ ترتیبِ زماں کھولتے ہیں ۔۔۔۔۔۔۔ عبدالرحمان واصف आप के दर्द गजी़दों की जु़बान खोलते हैं लफ्ज़ कि़रतास पर जब दिल का धुंआ खोलते हैं बढ़ती जाती है त'अफ़्फ़ुन की हिलाकत खैजी  ज़ख्म अपने जो कभी तिश्ना-लबां खोलते हैं मुंतज़िर शख्स ये बेहतर है मजी़द आस न रख दिल का दरवाज़ा वह हर एक पर कहां खोलते हैं आप तरकश में रखे तीर बराबर कर लें हम अज़ा ख़ान_ए_ वहशत ज़दगां खोलते हैं लब पे लाते हैं वह बस एक तबस्सुम की रमक़ और हमकते हुए दिल रख़त_ए_ गुमां खोलते हैं आइए आपको मिलवाते हैं बेदारी से आइए आप पे ये तरतीबे ज़मा खोलते हैं...

Sher_Poet_Suhail Rai

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ہم کسی آنکھ کے شہر میں قید ہیں  زندگی نیند ہے آدمی خواب ہیں سہیل رائے हम किसी आंख के शहर में क़ैद हैं ज़िंदगी नींद है आदमी ख़्वाब है सोहैल राय

Sher_Poet_Hasan Zaidi

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तुम्हारे ‌बाद किसी और को जुदा करके पुराने ग़म को मनाया गया नया करके हसन ज़ैदी تمہارے بعد کسی اور کو جدا کر کے  پرانے غم کو منایا گیا نیا کر کے  حسن زیدی

Nazm_Baawri_Poet Rashid Malik

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बावरी आंखें तेरी नूर का मंबा मीठे तेरे बोल रूप सलोना जैसे सोना  धातों में अनमोल रंग चुराए तुझसे शामें तू काजि़ब का का नूर तेरा होना ख़ुशकुन ऐसे फ़सल उठाए बौर तेरा जागा नींद से भागे जैसे कोई भूत तुझ को छूने वाला जैसे अवतारों का पूत तू सखियों में ऐसे सुंदर जैसे गंगा चोटी तेरा हुस्न निराला ऐसे जैसे मरवारीद के मोती तू जिसको देखे वह चमके जैसे पूरन चांद जो तुझको सुन ले वो सारे जन्मों तेरा बांद मेरे घर की बेलें , बूटे मेरे घर की शाम मेरी सारी ग़ज़लें नज़्में मेरे क़ते तेरे नाम राशिद मलिक باوری آنکھیں تیری نور کا منبع میٹھے تیرے بول روپ سلونا جیسے سونا دھاتوں میں انمول رنگ چرائیں تجھ سے شامیں تو کاذب کا نور تیرا ہونا خوش کن ایسے فصل اٹھائے بور تیرا جاگا نیند سے بھاگے جیسے کوئی بھوت تجھ کو چھونے والا جیسے اوتاروں کا پوت تو سکھیوں میں ایسے سندر جیسے گنگا چوٹی** تیرا حسن نرالا ایسے مروارید کے موتی تو جس کو دیکھے وہ چمکے جیسے پورن چاند جو تجھ کو سن لے وہ سارے جنموں تیرا باند میرے گھر کی بیلیں بوٹے میرے گھر کی شام میری ساری نظمیں، غزلیں، قطعے تیرے نام راشد ملک 

Ghazal_Poet_Faqeeh Haider

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दिल उजड़ जाए मेरी आंख भी वीरान ना हो कैसे मुमकिन है जुनूं में कोई नुकसान ना हो उंगलियां हम पे उठाते हैं वही सारे लोग जिनका अपना कोई शजरा कोई पहचान ना हो इतनी वीरानी कभी पहले नहीं देखी थी कोई तो मुझसे कहे यार परेशान ना हो ख़ून देते हुए गुज़री है मेरी सारी उम्र जिंदगी कहता हूं मैं जिसको बलिदान ना हो ऐसे लोगों पे तरस आता है मुझको जिनका आंख होते हुए भी ख़्वाब पे ईमान ना हो फूल लाया है कोई मेरे लिए ठीक मगर जिसको गुलदान समझता हूं नमकदान ना हो किसी मुश्किल से गुजऱने की मुझे ख़्वाहिश है  ऐसी मुश्किल जो किसी तौर में आसाम ना हो दशत में घूमता हूं, नाचता हूं, सोचता हूं दशत भी मेरे मकां का कहीं दालान ना हो ऐसे लोगों में मेरी शायरी की क्या औका़त मो'तबर जिनके लिए मीर का दीवान ना हो उस उदासी पे अजीयत पे पड़े खा़क फ़कीह नम अगर आंख मेरी हिज्र के दौरान ना हो फ़की़ह हैदर ،، غزل ،، دل اُجڑ جائے مری آنکھ بھی ویران نہ ہو   کیسے ممکن ہے جنوں میں کوئی نقصان نہ ہو ؟ انگلیاں ہم پہ اٹھاتے ہیں وہی سارے لوگ    جن کا اپنا کوئی شجرہ کوئی پہچان نہ ہو اتنی ...

Sher_Poet_Asif Mahmood Kaifi

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तुम्हारे ख़त भी सलामत तुम्हारी खु़शबू भी तुम अब भी ऐसा समझती हो कितनी पागल हो आसिफ़ महमूद कैफ़ी تمہارے خط بھی سلامت تمہاری خوشبو بھی تم اب بھی ایسا سمجھتی ھو کتنی پاگل ھو ! آصؔف محمود کیفی

Nazm_ Kamal Funn Hai_Poet_ Atif Javed Atif

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कमाल फ़न है चमकती आंखों में दर्द भर के हर एक आंसू को ज़प्त कर के सुलगते ख़्वाबों की राख लेकर यूं अपनी आंखें उजाल रखना कमाल फ़न है? बड़ी सहुलत से सुर्ख़ आंखों की सरहदो तक फ़शारे खूं को सजा के रखना, हुनर है जानां । जुबां के पत्थर उछालते हैं यह शहर वाले तो ऐसे आलम में किर्चियों को बचाए रखना, हसीन चेहरे पर मुस्कुराहट सजाए रखना. सजा के लब पर यह सुर्ख़  लाली खु़द अपने ज़ख्मों पे मुस्कुराना---कमाल फ़न है--। मलाल_ओ_ वहशत के टुकड़े टुकड़े शिकस्ता तर दिल के आईने में सियाह जु़ल्फों के पेच_ओ_ ख़म को संवार लाना कमाल फ़न है---! हसीन लड़की!! तुम्हारे चेहरे से लग रहा है कि तुम मोहब्बत में बेवफा़ई के सब अजा़बों  से आशना हो- मगर उदासी का इसतेआरा! की एक आंसू भी चश्म ए ख़ुश में लगे सितारा हुनर तुम्हारा--! हसीन लड़की तुम्हारा असलूब कह रहा है-- तुम्हें मोहब्बत की नोहाखा़नी पे दस्तरस है-- आतिफ़ जावेद आतिफ़ کمال فن ہے"  چمکتی آنکھوں میں درد  بھر کے  ۔۔ ہر ایک آنسو کو ضبط کر کے۔ ۔۔ سلگتے خوابوں  کی راکھ لیکر  یوں اپنی آنکھیں  اُجال رکھنا ۔۔ کمال فن ہے۔ ۔؟   بڑی ...

Ghazal_Poet_Aamir Abeez

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रगों की सतह पे पुख़्ता उभार करता हुआ है एक रोग मुसलसल फ़शार करता हुआ है एक ज़मीं, फ़लक की तवाफ़ में रक़्सां एक आसमां, ज़मीं को मदार करता हुआ हवा का ऐसा तहर्रुक नवाह से  गुज़रा दरुनी मौसमों को बेक़रार करता हुआ वह एक लम्स किसी मुअज्ज़े से कम तो नहीं बदन की लम्स को यकसर शरार करता हुआ ज़मां की सैर को कुंज ए ख़ला में पहुंचा है धुएं की खेप को वह तार तार करता हुआ कोई वजूद है मुझमें ज़ुजाज की सूरत जो कुन के भेद को है ताबकार करता हुआ आमिर अबीज़ غزل رگوں کی سطح پہ پختہ ابھار کرتا ہوا ہے ایک روگ مسلسل فشار کرتا ہوا ہے اک زمین ، فلک کے طواف میں رقصاں اک آسمان ، زمیں کو مدار کرتا ہوا ہوا کا ایسا تحرک نواح سے گزرا درونی موسموں کو بے قرار کرتا ہوا وہ ایک لمس کسی معجزے سے کم تو نہیں  بدن کی برف کو یکسر شرار کرتا ہوا زماں کی سیر کو کنجِ خلا میں پہنچا ہے دھویں کی کھیپ کو وہ تار تار کرتا ہوا کوئی وجود ہے مجھ میں زجاج کی صورت جو کُن کے بھید کو ہے تابکار کرتا ہوا عامرابیض

Nazm_Dushman_Poet_Sharshar Faqeerzada

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दुश्मन किसी भी गोरी कलूटी काली किसी भी लड़की से बात करना किसी भी चुपचाप बोलती खा़रतन, खुश बदन हसीना से बात करना उसको सुनना   कुछ ना कहना व कुछ ना सुनना किसी भी लड़की की खामोशी से ही लुत्फ़ लेना किसी भी लड़की से प्यार करना  किसी भी लड़की से इश्क करने का रास्ता अब तलक खुला  है किसी भी लड़की को चाहने का  अब तलक मुझ में हौसला है किसी किसी भी लड़की _____ ओ कोई लड़की तुम्हारी उल्फ़त में इतने सारे  हैं ज़ख़्म खाए कि कुछ न पूछो और उनका तेरे सिवा किसी भी हसीना,  डायन मिज़ाज लड़की किसी भी लड़की को चाहना दरमन व दवा है मगर मैं तुझको ही चाहता हूं मेरा अदू  तेरा अब्बा नहीं है मैं  आप खुद हूं सरशार फ़कीधरजा़दा دشمن 😉😂 کسی بھی گوری ، کلوٹی کالی  کسی بھی لڑکی سے بات کرنا  کسی بھی چپ چاپ ، بولتی، خار تن، خوش بدن حسینہ سے بات کرنا  یا اس کو سننا  یا کچھ نہ کہنا و کچھ نہ سننا  کسی بھی لڑکی کی خامشی سے ہی لطف لینا  کسی بھی لڑکی سے پیار کرنا  کسی بھی لڑکی سے عشق کرنے کا راستہ اب تلک کھلا ہے  کسی بھی لڑکی کو چاہ...

Ghazal_Poet_Paras Mazari

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इस रूह पर अभी सरे बिस्तर नहीं किया पाकिज़गी का तजुर्बा छूकर नहीं किया पानी ना दे सका जहां आंसू बहा दिए मैंने किसी ज़मीन को बंजर नहीं किया इस बार चुप सा रह गया सुनकर सवाल ए इश्क़ इस बार दिल ने हाथ भी ऊपर नहीं किया कुछ और इंतज़ार ऐ जाहिर परस्त दोस्त मयार ए ज़िंदगी अभी बेहतर नहीं किया मेहराब और दाग में तफ़रीक़ कैसे हो किस-किस को हमने माथे का झूमर नहीं किया पारस मज़ारी اس روح پر ابھی سرِ بستر نہیں کیا  پاکیزگی کا تجربہ چھوکر نہیں کیا  پانی نہ دے سکا جہاں ، آنسو بہا دیے  میں نے کسی زمین کو بنجر نہیں کیا  اس بار چپ سا رہ گیا سن کر سوالِ عشق  اس بار دل نے ہاتھ بھی اوپر نہیں کیا  کچھ اور انتظار اے ظاہر پرست دوست  معیارِ زندگی ابھی بہتر نہیں کیا  محراب اور داغ میں تفریق کیسے ہو  کس کس کو ہم نے ماتھے کا جھومر نہیں کیا  پارس مزاری