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Ghazal_Poet_Bushra Bhakhtiar Khan

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उदास लोगों के साथ रहना पड़ा कभी तो पता चलेगा कभी हुई जो बुझी निगाहों से दोस्ती तो पता चलेगा पता चलेगा कि कौन किस से भला कहां तक है प्यार करता हर एक अजी़यत अकेली जां पर अगर सही तो पता चलेगा हमें पता ही नहीं कि कैसे यह लोग खुश बाश रह रहे हैं कभी कहीं जो मिली हमें भी कोई ख़ुशी तो पता चलेगा मैं अपने प्यारों पे जान छिड़कूं हर एक क़दम पर निभाऊं रिश्ते कभी जो महसूस होगी उनको मेरी कमी तो पता चलेगा यूं तपते सेहरा में जान देना, युं घर लुटाना, यूं ज़ुल्म सहना अगर करें कोई इस तरह से जो बंदगी तो पता चलेगा बुशरा बख़्तियार ख़ान اداس لوگوں کے ساتھ رہنا پڑا کبھی تو پتہ چلے گا  کبھی ہوئی جو بجھی نگاہوں سے دوستی تو پتہ چلے گا پتہ چلے گا کہ کون کس سے بھلا کہاں تک ہے پیار کرتا ہر اک اذیّت اکیلی جاں پر اگر سہی تو پتہ چلے گا ہمیں پتہ ہی نہیں کہ کیسے یہ لوگ خوش باش رہ رہے ہیں کبھی کہیں جو ملی ہمیں بھی کوئی خوشی تو پتہ چلے گا میں اپنےپیاروں پہ جان چھڑکوں،ہراک قدم پرنبھاؤں رشتے کبھی جو محسوس ہو گی ان کو ...