Ghazal_Poet_Maouvez Hasan
उदासी चिड़चिड़ापन रतजगा है कोई आसेब मुझ में पल रहा है जहां की इरतकाई साजि़शों में जमीं एक मो'जजा़ती हादसा है मेरे अंदर का आवारा मुसाफ़िर ख़्यालों की ट्रैफ़िक में फंसा है ख़सारों पर भी खुल कर हंस रहे हैं हमारा कर्ब बूढ़ा हो गया है कई हफ़्तों से सरवत पढ़ रहा था और अब दिल पटरियों पर चल रहा है मुसव्विर ने मेरा चेहरा बनाकर ख़सारा कैनवस पर धर दिया है तुम्हारी ओर देखा, और देखा नदी का रंग पीला पड़ गया है मैं उसके वसवसों में आ गया हूं वह जिससे टेलिफो़निक राब्ता है घड़ी की सुइयां उल्टी घुमाकर मुक़द्दर हम को थप्पड़ मारता है मोहब्बत की लड़ाई में मु'अव्विज़ तकल्लुफ़ इबतदाई सानेहा है मु'अव्विज़ हसन اداسی چڑچڑاپن رتجگا ہے کوئی آسیب مجھ میں پل رہا ہے جہاں کی ارتقائی سازشوں میں زمیں اک معجزاتی حادثہ ہے مرے اندر کا آوارہ مسافر خیالوں کی ٹریفک میں پھنسا ہے خساروں پر بھی کھل کر ہنس رہے ہیں ہمارا کرب بوڑھا ہو گیا ہے کئی ہفتوں سے ثروت پڑھ رہا تھا اور اب دل پٹریوں پر چل رہا ہے مصور نے مرا چہرہ بنا کر خسارہ کینوس پر دھر دیا ہے تمہاری اور دیکھا، اور دیکھ...