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Ghazal_Poet_Faqeeh Haider

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،،غزل ،، چراغ نیند کی محراب تک نہیں آیا  قسم ہے آنکھ میں اک خواب تک نہیں آیا चराग़ नींद की मेहराब तक नहीं आया  क़सम है आँख मे एक ख़्वाब तक नहीं आया  سبھی نے شوق ِ شہادت میں سر کٹا دئیے ہیں کوئی بھی جنگ کے اسباب تک نہیں آیا सभी ने शौक़_ए_शहादत मे सर कटा दिए हैँ  कोई भी जंग के असबाब तक नहीं आया ہمارے عشق سے کیسے ملے جنوں کو فروغ  ہمارا عشق تب و تاب تک نہیں آیا हमारे इश्क़ से कैसे मिले जनूं को फ़रोग़  हमारा इश्क़ तब_ओ_ताब तक नहीं आया  ابھی مشیت ِ خالق نہیں پڑھی تونے ؟ ابھی تو سورہ ء احزاب تک نہیں آیا अभी मशीयत_ए_ख़ालिक़ नहीं पढ़ी तु ने  अभी तु सुरह_ए_अहज़ाब तक नहीं आया وہ رنگ زنگ ہوا یا بنا دھواں آخر  جو رنگ اس لب ِ نایاب تک نہیں آیا वह रंग रंग हुआ या बना धुआँ आख़िर  जो रंग उस लब_ए_नायब तक नहीं आया بھرے ہیں مشکوں میں مشکیزگاں نے دریا تک  ہمارے ہاتھ میں تالاب تک نہیں آیا भरे हैँ मुश्कों मे मुश्केजगाँ ने दरया तक  हमारे हाथ मे तालाब तक नहीं आया ندی چڑھی ہے کئی بار میری آنکھوں کی  مگر یہ سلسلہ سیلاب تک نہیں آیا नदी चढ़ी है कई बार मेरी आँखों...

Ghazal_Poet_Zamir Qais

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शीशे जैसे अक्स को ओढ़ा जा सकता है दिल तो पत्थर का भी तोड़ा जा सकता है सूखे पौधों को भी दे सकते हैं पानी टूटे रिश्तों को भी जोड़ा जा सकता है खोले जा सकते हैं घर के सब दरवाज़े तन्हाई से मुंह भी मोड़ा जा सकता है मुश्किल है लेकिन थोड़ी सी कोशिश करके दिल के कुछ हिस्सों को जोड़ा जा सकता है ख़्वाबों की अंधी गलियों में आग लगाकर सोने वालों को झिंझोडा़ जा सकता है दिल को छूती रहती है जो आस हमेशा उस पगली का हाथ मरोड़ा जा सकता है रस्ता तकते तकते पत्थर हो जाती हैं वरना इन आंखों को फोड़ा जा सकता है है किस काम के दौलत, शोहरत, रिश्ते नाते साथ में कोई लेकर थोड़ा जा सकता है अब भी मेरे कपड़ों में है खुशबू उसकी हिज्र से अब भी विसल निचोड़ा जा सकता है जाने वाली गाड़ी पकड़ी जा सकती है ज़ख़्मी पैरों से भी दौड़ा जा सकता है सिगरेट नोशी सी बे लज़्ज़त आदत हूं मैं मुझको जब जी चाहे छोड़ा जा सकता है इश्क़ नगर है उजड़े दिल वालों की बस्ती कै़स तो करके सीना चौड़ा जा सकता है ज़मीर कै़स شیشے جیسے عکس کو اوڑھا جا سکتا ہے دل تو پتھر کا بھی توڑا جا سکتا ہے سوکھے پودوں کو بھی دے سکتے ہیں پانی ٹوٹے رشتوں کو بھی جوڑا جا سکتا ہ...

Ghazal_Poet_Ahmed Imtiaz

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जवाब एक सा है और सवाल एक सा है ये क्या हुआ है कि दोनो का हाल एक सा है  बुलंदियों का वहां है तो पस्तियों का यहां है  बस आसमा_ओ_ज़मीं का कमाल एक सा है हर एक शख्स का अंजाम रायगानी है ये ज़िंदगी है तो सब पे वबाल एक सा है जुदाई  आंख में आंसू हैं मिलना खंदा ब लब फ़िराक एक सा सबका विसाल एक सा है कोई भी साअत खुश रंग आज तक न मिली हमारे वास्ते हर एक साल एक सा है  अहमद इम्तियाज جواب ایک سا ہے اور سوال ایک سا ہے یہ کیا ہوا ہے کہ دونوں کا حال ایک سا ہے بلندیوں کا وہاں ہے تو پستیوں کا  یہاں  بس آسمان و زمیں کا کمال ایک سا ہے ہر ایک شخص کا انجام رائیگانی ہے یہ زندگی ہے تو سب پہ وبال ایک سا ہے جدائی آنکھ میں آنسو ہیں ملنا خندہ بہ لب فراق ایک سا سب کا وصال ایک سا ہے کوئی بھی ساعت خوش رنگ آج تک نہ ملی ہمارے واسطے ہر ایک سال ایک سا ہے احمد امتیاز