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#Urdu Poetry #Hindi Poetry

Sheir_Poet_Rahat Sarhadi

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فریب کھایا ہے ایسا کہ زہر لگتی ہے  مجھے تو لوگوں کے چہروں پہ مسکراہٹ تک  راحتؔ سرحدی फ़रेब खाया है ऐसा कि ज़हर लगती है मुझे तो लोगों के चेहरे पे मुस्कुराहाट तक राहत सरहदी

Ghazal_Poet_Iqbal Naveed

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मैं था कि मेरे साथ कोई जागता रहा लगता है  सारी रात कोई जागता रहा थपकी के साथ कोई सुलाता रहा मुझे मै सो गया तो हाथ कोई जागता रहा ऐसा सफ़र था नींद में चलते रहे क़दम जैसे दरून_ए_ज़ात़  कोई जागता रहा पहलू बदल बदल के रहे खेत में मगन होने लगी थी मात कोई जागता रहा चोरों की तरह वक़्त गुज़ारा मचान पर शब भर लगा के घात कोई जागता रहा इक सम्त शोर दिल का मगर दूसरी तरफ़ ख़ामोश इहतेयात कोई जागता रहा वो आग थी नवीद कि जलती रही ज़मीं बहता रहा फ़रात कोई जागता रहा इक़बाल नवीद غزل ۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔ میں تھا کہ میرے ساتھ کوئی جاگتا رہا لگتا ہے ساری رات کوئی جاگتا رہا تھپکی کے ساتھ کوئی سُلاتا رہا مجھے میں سو گیا تو ہاتھ کوئی جاگتا رہا ایسا سفر تھا نیند میں چلتے رہے قدم جیسے درونِ ذات کوئی جاگتا رہا پہلو بدل بدل کے رہے کھیل میں مگن ہونے لگی تھی مات کوئی جاگتا رہا چوروں کی طرح وقت گزارا مچان پر شب بھر لگا کے  گھات کوئی جاگتا رہا اک سمت شور دل کا مگر دوسری طرف خاموش  احتیاط  کوئی  جاگتا  رہا وہ آگ تھی نوید کہ جلتی رہی زمین بہتا  رہا  فرات  کوئی  جاگت...

Nazm(Kavita)_Pamaal Khushbu_Poet_ Tahzeeb Abrar

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पामाल ख़ुशबू वो आखि़र होगई हासिल जो शए मतलूब थी तुमको अजल का खौफ़ बेमानी अजल महबूब थी तुमको तुम्हें शिकवा बहुत था ना कि मेरी जा़त के अंदर कोई आंधी सी चलती है हमेशा धूल उड़ती है गिला तुमको यही था ना कि मुझ में खारज़ारों का सुलगते रेग ज़ारों का अजब इक सिलसिला सा है उठो । देखो ज़रा आ कर तुम अपनी क़ब्र का मंज़र हज़ारों फूल महके हैं हज़ारों रंग बिखरे हैं तहज़ीब अबरार ( پامال خوشبو ) وہ آ خر ہوگئی حاصل جو شئے مطلوب تھی تم کو اجل کا خوف بے معنیٰ اجل محبوب تھی تم کو تمہیں شکوہ بہت تھا نا ! کہ میری ذات کے اندر  کوئی آ ندھی سی چلتی ہے ہمیشہ دھول اڑتی ہے گلہ تم کو یہی تھا نا ! کہ مجھ میں خارزاروں کا سلگتے ریگ زاروں کا عجب اک سلسلہ سا ہے  اٹھو ! دیکھو ذرا آ کر  تم اپنی قبر کا منظر  ہزاروں پھول مہکے ہیں ہزاروں رنگ بکھرے ہیں   تہذیب ابرار

Ash'aar_Poet_Arif Nazeer

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आंखों से किसी ख़ास गुज़ारिश का मज़ा ले मौसम की मज़ेदार नवाज़िश का मज़ा ले इस वक़्त हर एक ग़म को ताक़ पर रख कर आ खुल के मेरे साथ तू बारिश का मज़ा ले आरिफ़ नज़ीर   آنکھوں سے کسی خاص گزارش کا مزہ لے موسم کی مزیدار نوازش کا مزہ لے اس وقت ہر اک غم کو کہیں طاق پہ رکھ کر آ کھل کے مرے ساتھ تو بارش کا مزہ لے عارف نظیر

Nazm(Kavita)_Mohabbat Gahri Hojae_Poet_yusuf Khalid

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मुहब्बत गहरी होजाए तो अपना रुख़ बदलती है तसलसुल तोड़ती है गुफ़्तगू पे चुप की चादर डाल देती है यूसुफ़ खालिद محبت گہری ہو جائے تو اپنا رخ بدلتی ہے تسلسل توڑتی ہے  گفتگو پہ چپ کی چادر ڈال دیتی ہے یوسف خالد

Sher_Poet_Amaanullah Khan Amaan

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इक रिदा_ए_खाम्शी ओढ़ी है सारे शहर ने हर बदन ज़ख्मी है लेकिन बोलता कोई नही AmaanUllah Khan Amaan اک ردائے خامشی اوڑھی ھے سارے شہر نے  ہر بدن زخمی ہے لیکن بولتا کوئی نہیں ۔ امان اللہ خان امانؔ

Sher_Poet_Arsala Shah

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किसी की मुन्तजि़र आंखों के कोने तुम्हारा नाम लेकर भींगते है अरसला کسی کی منتظر آنکھوں کے کونے  تمہارا نام لیکر بھیگتے ہیں  ارسلہ

Ghazal_Poet_Aaila Tahir

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क़ुर्बतों के नशे याद आने लगे, शाम ठहरी रही राख से सर्द शोले उठाने लगे, शाम ठहरी रही अव्वल अव्वल समाअत में महके हुए बे बहा ज़मज़मे मुस्कुराने लगे, सर उठाने लगे, शाम ठहरी रही तिश्नगी और मैं साथ चलते रहे तारे जलते रहे रेत की धुन पर हम गुनगुने लगे, शाम ठहरी रही कोई वहशत ज़दा उस गली में गया, वक़्त रुक सा गया फिर पलटने में उसको ज़माने लगे, शाम ठहरी रही नाम तेरा किसी ने लिया बज़्म में और तेरे मातमी आंख भरने लगी, नम छुपाने लगे शाम ठहरी रही एक खिड़की खुली याद की , तेज़ बारिश बरसने लगी नक्श़_ए_ला हासली जगमगाने लगे, शाम ठहरी रही इक क़दीमी तमन्ना के साहिल पे कच्चे घरोंदे थे हम तेज़ आंधी चली ,हम ठिकाने लगे , शाम ठहरी रही आईला ताहिर قربتوں کے نشے یاد آنے لگے ، شام ٹھہری رہی راکھ سے سرد شعلے اٹھانے لگے،شام ٹھہری رہی اول اول سماعت میں مہکے ہوئے بے بہا زمزمے  مسکرانے لگے ،سر اٹھانے لگے ،شام ٹھہری رہی تشنگی اور میں ساتھ چلتے رہے تارے جلتے رہے  ریت کی دھن پہ ھم گنگنانے لگے ،شام ٹھہری رہی کوئی وحشت زدہ اس گلی میں گیا، وقت رک سا گیا پھر پلٹنے میں اُس کو زمانے لگے ،شام ٹھہری رہی نام تیرا کسی نے لیا...

Ghazal_Poet_Ahmed Imtiaz

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जवाब एक सा है और सवाल एक सा है ये क्या हुआ है कि दोनो का हाल एक सा है  बुलंदियों का वहां है तो पस्तियों का यहां है  बस आसमा_ओ_ज़मीं का कमाल एक सा है हर एक शख्स का अंजाम रायगानी है ये ज़िंदगी है तो सब पे वबाल एक सा है जुदाई  आंख में आंसू हैं मिलना खंदा ब लब फ़िराक एक सा सबका विसाल एक सा है कोई भी साअत खुश रंग आज तक न मिली हमारे वास्ते हर एक साल एक सा है  अहमद इम्तियाज جواب ایک سا ہے اور سوال ایک سا ہے یہ کیا ہوا ہے کہ دونوں کا حال ایک سا ہے بلندیوں کا وہاں ہے تو پستیوں کا  یہاں  بس آسمان و زمیں کا کمال ایک سا ہے ہر ایک شخص کا انجام رائیگانی ہے یہ زندگی ہے تو سب پہ وبال ایک سا ہے جدائی آنکھ میں آنسو ہیں ملنا خندہ بہ لب فراق ایک سا سب کا وصال ایک سا ہے کوئی بھی ساعت خوش رنگ آج تک نہ ملی ہمارے واسطے ہر ایک سال ایک سا ہے احمد امتیاز

Sher_Poet_Isar Shaukat

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किताब ए कै़स से नुस्खा़ निकाल लाया हूं वबा ए ग़म के मरीज़ो दवाई ले जाओ इसार کتاب قیس سے نسخہ نکال لایا ہوں وبائے غم کے مریضو دوائی لے جاؤ                             ایثار