क़ुर्बतों के नशे याद आने लगे, शाम ठहरी रही राख से सर्द शोले उठाने लगे, शाम ठहरी रही अव्वल अव्वल समाअत में महके हुए बे बहा ज़मज़मे मुस्कुराने लगे, सर उठाने लगे, शाम ठहरी रही तिश्नगी और मैं साथ चलते रहे तारे जलते रहे रेत की धुन पर हम गुनगुने लगे, शाम ठहरी रही कोई वहशत ज़दा उस गली में गया, वक़्त रुक सा गया फिर पलटने में उसको ज़माने लगे, शाम ठहरी रही नाम तेरा किसी ने लिया बज़्म में और तेरे मातमी आंख भरने लगी, नम छुपाने लगे शाम ठहरी रही एक खिड़की खुली याद की , तेज़ बारिश बरसने लगी नक्श़_ए_ला हासली जगमगाने लगे, शाम ठहरी रही इक क़दीमी तमन्ना के साहिल पे कच्चे घरोंदे थे हम तेज़ आंधी चली ,हम ठिकाने लगे , शाम ठहरी रही आईला ताहिर قربتوں کے نشے یاد آنے لگے ، شام ٹھہری رہی راکھ سے سرد شعلے اٹھانے لگے،شام ٹھہری رہی اول اول سماعت میں مہکے ہوئے بے بہا زمزمے مسکرانے لگے ،سر اٹھانے لگے ،شام ٹھہری رہی تشنگی اور میں ساتھ چلتے رہے تارے جلتے رہے ریت کی دھن پہ ھم گنگنانے لگے ،شام ٹھہری رہی کوئی وحشت زدہ اس گلی میں گیا، وقت رک سا گیا پھر پلٹنے میں اُس کو زمانے لگے ،شام ٹھہری رہی نام تیرا کسی نے لیا...