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Nazm(कविता)_Mai Sochta Hun_Poet Iftekhar Bukhari

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मैं सोचता हूं अगर दो रास्ते होते तुम तक जाने के लिए किसी बाग़ में चहल कदमी की तरह यख़ बसता पहाड़ों में सफे़द सुरंगो जैसे अगर दो ख़्वाब होते सहमी हुई ख़ामोश रातों में जागने के लिए  सोने के लिए अगर दो जंगल होते पुर असरारी में भटकने के लिए या दुनिया दारों से कटने के लिए अगर दो परिंदे होते   मोहब्बत के लिए अगर दो सराब होते  प्यासा जीने के लिए प्यासा मरने के लिए अगर दो कहानियां होतीं कंदीम चट्टान पर कंदा ना क़ाबिले फ़हम नक़ूश में मदफ़ून याद करने के लिए  भूल जाने के लिए अगर दो गीत होते  मेरे जीते जी आखिरी हिचकी की लेने के लिए या मेरे बाद कुछ पल  मुझे रोने के लिए अगर दो सितारे होते  सुबह काज़िब की दहलीज़ पर चमकने के लिए बुझने के लिए  उम्र गुज़ार कर  मैं सोचता हूं यह मुमकिन नहीं  इस दुनिया की बे इंतहाई में दो चीज़ें नहीं होतीं सिवाय दो तन्हाइयों के  तू  और मैं इफ़्तिख़ार बुखा़री میں سوچتا ہوں  ۔ اگر دو راستے ہوتے تم تک جانے کے لیے  کسی باغ میں چہل قدمی کی طرح  یخ بستہ پہاڑوں میں  سفید سرنگوں جیسے اگر دو خواب ہو...

Ash'aar_Poet_Arif Nazeer

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आंखों से किसी ख़ास गुज़ारिश का मज़ा ले मौसम की मज़ेदार नवाज़िश का मज़ा ले इस वक़्त हर एक ग़म को ताक़ पर रख कर आ खुल के मेरे साथ तू बारिश का मज़ा ले आरिफ़ नज़ीर   آنکھوں سے کسی خاص گزارش کا مزہ لے موسم کی مزیدار نوازش کا مزہ لے اس وقت ہر اک غم کو کہیں طاق پہ رکھ کر آ کھل کے مرے ساتھ تو بارش کا مزہ لے عارف نظیر

Sher_Poet_Amaanullah Khan Amaan

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इक रिदा_ए_खाम्शी ओढ़ी है सारे शहर ने हर बदन ज़ख्मी है लेकिन बोलता कोई नही AmaanUllah Khan Amaan اک ردائے خامشی اوڑھی ھے سارے شہر نے  ہر بدن زخمی ہے لیکن بولتا کوئی نہیں ۔ امان اللہ خان امانؔ

Sher_Poet_Muhammad Iftikhar Ul Haq

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दरिया_ए_इख्ति़यार जो रस्ता बदल गया।।। सेहरा_ए_जबर तेरा भी नक़्शा  बदल गया मुहम्मद इफ़्तिख़ार उल हक़ دریائے اختیار جو رستا بدل گیا !!! صحرائے جبر تیرا بھی نقشہ بدل گیا Muhammad Iftikhar Ul Haq